➤ छोटे शाही स्नान के लिए चंबा से भरमौर रवाना हुए 500 से ज्यादा वाहन
➤ डोडा-भद्रवाह समेत पंजाब और जम्मू-कश्मीर से पहुंचे हजारों शिव भक्त
➤ जयकारों के बीच यात्रा मार्ग पर जगह-जगह भंडारे, भरमौर के बाद डल झील जाएंगे श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा। जन्माष्टमी के छोटे शाही स्नान का समय नजदीक आते ही हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा 2026 में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ने लगी है। रविवार को चंबा से भरमौर की ओर 500 से अधिक छोटे-बड़े वाहन रवाना हुए। सुबह से ही यात्रा मार्ग पर शिव भक्तों की आवाजाही बनी रही और दोपहर बाद चंबा-भरमौर हाईवे पर श्रद्धालुओं के वाहनों की संख्या और बढ़ गई।
डोडा और भद्रवाह से श्रद्धालुओं के कई जत्थे चंबा पहुंचे। इन जत्थों ने कुछ समय के लिए चंबा के ऐतिहासिक चौगान में डेरा डालकर विश्राम किया और इसके बाद भरमौर की ओर प्रस्थान किया। वहीं पंजाब और जम्मू-कश्मीर से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दोपहिया वाहनों पर मणिमहेश यात्रा के लिए पहुंचे। वाहनों में सवार श्रद्धालु भगवान शंकर के जयकारे लगाते हुए भरमौर की ओर बढ़ते नजर आए।
छोटे शाही स्नान को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। यात्रा के प्रमुख पड़ावों और रास्ते में स्थानीय लोगों तथा विभिन्न संस्थाओं की ओर से भंडारे और सेवा शिविर लगाए गए हैं। यहां यात्रियों को भोजन, पानी और जलपान उपलब्ध करवाया जा रहा है। इससे लंबी यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं को काफी राहत मिल रही है।
चौगान में डेरा डालकर भरमौर के लिए निकले श्रद्धालुओं के जत्थे
डोडा और भद्रवाह क्षेत्र से आए श्रद्धालुओं के जत्थे रविवार को चंबा पहुंचे। श्रद्धालुओं ने चौगान में कुछ समय रुककर आराम किया। यात्रा की थकान दूर करने के बाद जत्थे भरमौर की ओर रवाना हुए।
चंबा शहर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी से धार्मिक माहौल बना रहा। कई जगह भगवान शिव के जयकारे सुनाई दिए। इसके बाद श्रद्धालु अपने वाहनों के साथ भरमौर की ओर बढ़ते रहे।
यात्रा मार्ग पर शनि मंदिर के पास भी भंडारा लगाया गया है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को भोजन और जलपान करवाया जा रहा है। रास्ते में जगह-जगह स्थानीय लोग यात्रियों की सेवा में जुटे हुए हैं।
पंजाब और जम्मू-कश्मीर से भी बड़ी संख्या में पहुंचे शिव भक्त
मणिमहेश यात्रा में इस बार हिमाचल के अलावा दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ रही है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर से श्रद्धालु दोपहिया वाहनों और अन्य निजी वाहनों के माध्यम से चंबा और भरमौर की ओर पहुंच रहे हैं।
रविवार को चंबा-भरमौर मार्ग पर वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रही। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण यात्रा मार्ग पर धार्मिक उत्साह के साथ चहल-पहल भी बढ़ गई है।
श्रद्धालुओं में भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था देखने को मिल रही है। कई यात्री रास्ते में रुककर भंडारों में प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं और इसके बाद अगले पड़ाव के लिए रवाना हो रहे हैं।
छोटे शाही स्नान को लेकर बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़
जन्माष्टमी के छोटे शाही स्नान का समय नजदीक आने के साथ मणिमहेश यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। रविवार को इसका असर चंबा से भरमौर जाने वाले मार्ग पर साफ दिखाई दिया।
डोडा और भद्रवाह से आए श्रद्धालुओं के जत्थों में यात्रा को लेकर खासा उत्साह नजर आया। श्रद्धालुओं का कहना है कि वे भगवान शंकर के दर्शन और पवित्र डल झील में स्नान के लिए मणिमहेश पहुंच रहे हैं।
मणिमहेश की यात्रा श्रद्धालुओं के लिए केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, कठिन पैदल सफर और प्रकृति के बीच आध्यात्मिक अनुभव से जुड़ी यात्रा मानी जाती है। यही वजह है कि हर साल देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
भरमौर हेलीपैड से डल झील की ओर जाएंगे श्रद्धालु
भद्रवाह से पहुंचे श्रद्धालुओं के जत्थे में शामिल प्रहलाद कुमार, अमर चंद, शेखर, सुभाष कुमार, हरीश कुमार, वीरेंद्र और मान सिंह ने बताया कि उनका जत्था पिछले वर्ष मणिमहेश यात्रा पूरी नहीं कर पाया था। इस बार भगवान शंकर के दर्शन को लेकर सभी में खासा उत्साह है।
श्रद्धालुओं ने बताया कि चंबा से भरमौर पहुंचने के बाद उनका अगला पड़ाव हेलीपैड रहेगा। वहां से वे भरमाणी माता मंदिर के दर्शन करने के बाद डल झील के लिए रवाना होंगे।
इसके बाद पवित्र कैलाश पर्वत के दर्शन और डल झील में स्नान करने की उनकी योजना है। यात्रा पूरी करने के बाद श्रद्धालु वापस चंबा लौटेंगे और चौगान में ठहरने की योजना है।
पिछले साल यात्रा पूरी नहीं कर पाए थे श्रद्धालु
भद्रवाह से आए श्रद्धालुओं ने बताया कि पिछले वर्ष किसी कारण से उनका जत्था यात्रा पूरी नहीं कर पाया था। इस बार वे पूरी श्रद्धा के साथ मणिमहेश पहुंचने के लिए निकले हैं।
उनका कहना है कि मणिमहेश भगवान शंकर की आस्था से जुड़ा पवित्र स्थल है। यहां पहुंचकर कैलाश पर्वत के दर्शन करना और डल झील में स्नान करना उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण धार्मिक अनुभव है।
श्रद्धालुओं की मान्यता है कि मणिमहेश में सच्चे मन से की गई प्रार्थना पूरी होती है। इसी विश्वास और आस्था के कारण दूर-दराज के क्षेत्रों से लोग कठिन परिस्थितियों के बावजूद यात्रा पर निकलते हैं।
यात्रा मार्ग पर सेवा में जुटे लोग
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच यात्रा मार्ग पर सेवा गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। विभिन्न स्थानों पर भंडारे लगाए गए हैं, जहां यात्रियों को भोजन और पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के साथ विभिन्न संस्थाएं भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आगे आ रही हैं। यात्रा के दौरान लंबी दूरी तय करने वाले श्रद्धालुओं के लिए ऐसे सेवा शिविर महत्वपूर्ण सहारा बन रहे हैं।
चंबा से भरमौर तक श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती आवाजाही को देखते हुए आने वाले दिनों में यात्रा मार्ग पर भीड़ और वाहनों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। छोटे शाही स्नान के नजदीक आते ही मणिमहेश की ओर जाने वाले मार्ग पर धार्मिक गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।
आस्था के रंग में रंगा चंबा-भरमौर मार्ग
रविवार को चंबा से भरमौर की ओर जाने वाला मार्ग शिव भक्तों की आवाजाही से आस्था के रंग में रंगा नजर आया। कहीं वाहनों में सवार श्रद्धालु हर-हर महादेव के जयकारे लगाते दिखाई दिए तो कहीं भंडारों में यात्रियों की सेवा की जा रही थी।
500 से अधिक छोटे-बड़े वाहनों के भरमौर की ओर रवाना होने से यह साफ है कि छोटे शाही स्नान को लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंच रहा है। डोडा, भद्रवाह, पंजाब और जम्मू-कश्मीर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी इस धार्मिक यात्रा में अपनी भागीदारी दर्ज करवाई है।
आने वाले दिनों में मणिमहेश यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में यात्रा मार्ग पर प्रशासनिक व्यवस्थाओं के साथ स्थानीय स्तर पर सेवा और सहयोग की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहने वाली है।



